GHAZAL : Swati kumari
सामान तुम्हारा रख रखा है, रखा है तुमको भी पर सम्भाल रखा है। बेनाम इस रिश्ते में भला क्या रखा है, फोन नहीं लगेगा फिर भी नम्बर मिला रखा है। उन मुलाकातों को कहीं बचा रखा है, रखा है कहीं दुर अपनी कब्र में ही दफना रखा है। देख के तेरी तस्वीर मेरी यादों ने फिर वही चर्चा रखा है, सपनों और हकीकत का फर्क मैंने उन्हें समझा रखा है। कोई उस नज़र से ना देख ले इस ख्याल ने भी मुझे जला रखा है, इसलिए मेरी नज़र का धागा मैंने तुझ पर लगा रखा है।