अन्य कविता 2 : प्रियंका निर्वाण


खता हुई है तो तेरी आँखों से
जिसकी चमक ने अपना बना लिया
फिर सजा मुझे क्यूँ
 
खता हुई तो तेरी मुस्कराहट से
जिसके तिल्लिस्म मुझपे चल गया
फिर कूसूरवारी मुझे क्यूँ
 
खता हुई तो तेरे काजल से
जिसमे हर रास्ता गुम हो चला
फिर इताब/दोष  मुझे क्यूँ
 
खता हुई है तो तेरे लबों से
जिसकी लाली में मैं कुछ न देख सका
फिर इलज़ाम मुझपर क्यूँ
 
खता तो हुई है पर हमारे अरमानों से
तो फिर ख्वाहिशों को सजा क्यूँ
ता-उम्र साथ साथ रहने का वादा किया था
अब अकेले छोड़कर जा रहे हो क्यूँ??

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