Villanelle Poem : Priyanka Nirwan
एक उम्र बीत चुकी है तुझे चाहते हुए तू क्यूं नहीं देखता मुझे, सबको देखते हुए तू आज भी बेखबर है सब जानते हुए एक उम्र बीत चुकी है तुझे चाहते हुए मैं रोज़ देखती हूँ तुझे घर आते हुए तू आज भी बेखबर है सब जानते हुए एक उम्र बीत चुकी है तुझे चाहते हुए और कई रातें निकल गयी हैं तुझे सोचते हुए तू आज भी बेखबर है सब जानते हुए एक उम्र बीत चुकी है तुझे चाहते हुए कल हिम्मत कर चली ही गयी थी घर तुम्हारे, सबके वहां होते हुए तू आज भी बेखबर है सब जानते हुए एक उम्र बीत चुकी है तुझे चाहते हुए पर कहना चाहती थी कल वो बात तुमसे, सबके सामने होते हुए कि तू आज भी बेखबर है सब जानते हुए एक उम्र बीत चुकी है तुझे चाहते हुए एक बार सुन ले मेरे दिल की जाते हुए के अब ना मैं रोक पाऊँगी इस दिल को धड़कते हुए तू आज भी बेखबर है सब जानते हुए
Hi Devyani!
ReplyDeleteSimilar to one of your response poem to Aga Shahid Ali(Suicide Note), this poem too stand with a
bold defying voice of your own.