villanelle - Kumar Abhimanyu

हो बिन कहे, ठेहरा तू हर मोड़ पर
हो यारा मेरे लिए
भूला तू खुद की डगर ओ यारा
मेरे लिए हर कदम
संग चली तेरी ही यारी
इस बेढंगी दुनिया के संगी
हम ना होते यारा
अपनी तो यारी अतरंगी है रे
कर बेरंगी शामें हुड़दंगी
मस्त-मलंगी यारा
अपनी तो यारी अतरंगी है रे
                        - दीपक रमोला, गुरप्रीत सैनी ('वजीर' फिल्म का गीत )

रामजस वाले दोस्तों कि याद में ...


तेरी याद आए है मुझे
मैं बुलाऊँ तू न आए, तू बुलाए मैं न आऊँ
अपनी तो यारी अतरंगी है रे

तू अलग शेहेर में, मैं उसी शेहेर में
तू जल्दी आजा, और कितना बुलाऊँ
तेरी याद आए है मुझे

रात दो बजे हैं, सोने दे ओ भाई रे
"अबे चल न गाडी निकाल, मैं जॉइंट जलाऊं"
अपनी तो यारी अतरंगी है रे

बहुत दिन हो गए रामजस गए
तू जल्दी आजा, तेरे साथ चलूँ
तेरी याद आये है मुझे

लोटन के छोले-कुलचे याद हैं तुझे?
आ छित्तर मार के याद दिलाऊँ
अपनी तो यारी अतरंगी है रे

और क्या है, तू तो जानता है रे
काके छड के न जाईं मैनु
तेरी याद आए है मुझे
अपनी तो यारी अतरंगी है रे    

Comments

Popular posts from this blog

City Poem: Arundhati Bhande

Ghazal : Priyanka Nirwan

Villanelle Poem : Priyanka Nirwan