Villanelle Rohini Sharma

     
    'समय मेरे हाथ से फिसल रहा है'

 समय मेरे हाथ से फिसल रहा है
 याद नहीं है अब कुछ भी
 सब कुछ पीछे  छुटे जा रहा है।

 कोशिश पर कोशिश की जा रही हैं
 पीछे रह ना जाऊ कहीं भी
 समय मेरे हाथ से फिसल रहा है।

 देखो कैसे हर पहर बढ़ रहा है
 समझ नहीं पा रहीं हूं कुछ भी
 सब कुछ पीछे छुटे जा रहा है।

 हर कोई अपने मुकाम पर पहुंच रहा है
चीज़ें असमंझस में है अब भी
समय मेरे हाथ से फिसल रहा है।

 अपनों का यकीन बढ़े जा रहा है
 बहुत कुछ हासिल करना है अभी
 सब कुछ पीछे छुटे जा रहा है।

 अपनी गलतियों से सिखना है बहुत कुछ
 अपनी मंजिल तक पहुंचना है अभी
 समय मेरे हाथों से फिसल रहा है
 सब कुछ पीछे छुटे जा रहा है।।


Comments

Popular posts from this blog

Ghazal : Priyanka Nirwan

City Poem: Arundhati Bhande

Villanelle Poem : Priyanka Nirwan